Friday, 10 April 2020

Manali yatra 2014

दोस्तों, आज मैं आपको ले चलता हूँ अपनी मनाली यात्रा पर, तो दोस्तों ये बात है जून 2014 की.एक दिन दोस्तों के साथ बैठे हुए थे तो बातों ही बातों में घूमने का प्लान बनने लगा और फिर मनाली जाने पर सहमति बनी.. और फिर आखिर वो दिन भी आ गया 27 जून, रात्रि 9 बजे के लगभग हम 5 दोस्त( संदीप गुर्जर, नीरज शर्मा, गोविन्द जांगिड,महरा और मैं नरेश गुर्जर) अपनी Swift कार में सवार होकर चल दिए अपने गाँव से जो कि रेवाड़ी हरियाणा में है! हमने रूट लिया वाया झज्जर सोनीपत होते हुए.लगभग 11 साढे़ 11 बजे सोनीपत के पास NH 1 पर चढ़कर चण्डीगढ़ की तरफ चले, थोड़ी दूर चलकर एक होटल पर रूके खाने के लिए. वैसे हम तीन लोगों ने घर पर ही खाना खा लिया था तो सिर्फ दो लोगों ने ही वहाँ खाया और निकल पड़े अपने आगे के सफर पर... गाड़ी संदीप चला रहा था तो मैंने सोचा मैं कुछ देर सो लेता हूँ ताकि दिन में गाड़ी चलाते समय नींद ना आये. पर गाड़ी में ऐसा म्यूजिक बज रहा था कि नींद नहीं आई. खैर लगभग 3 बजे हम कालका पहुंचे और वहां से हमने एक ट्रक वाले से रास्ता पूछा उसने जो रास्ता वो ही हमारा  GPS  भी बता रहा था, GPS  उसे NH 21 बता रहा था लेकिन उस रोड़ की हालत बहुत खराब थी,अब तक संदीप गाड़ी चलाते हुए थकने लगा था और उसे नींद की झपकी भी आ रही थी सो अब मैं गाड़ी ड्राइव करने लगा.एकदम  सुनसान रोड़ और उजाड़ एरिया,हमे लगा कि हम गलत रास्ते पर है पर और कोई रास्ता भी नहीं था तो बस धीरे धीरे उसी टूटे फूटे रोड़ पर चलते रहे.. लगभग 1 घंटे बाद पहाड़ की चढाई शुरू हो गई. अब कुछ मकान भी दिखने लगे तो जान में जान आई. थोड़ी देर बाद हम कीरतपुर मनाली रोड़ पर पहुँच गए अब धीरे धीरे उजाला होना शुरू हो गया. सुबह लगभग 6:30 हम एक ढाबे पर रूके, वहाँ फ्रेश होकर नाश्ता किया, नाश्ते में आलू पराठे और दही लिया, गजब का स्वाद था, कुछ देर वहाँ आराम किया और फिर निकल पड़े मंजिल की ओर... अब गाड़ी धीरे धीरे चल रही थी क्योंकि हम रास्ते के नजारे लेते जा रहे थे.. बीच में रूक रूक कर फोटो खीच रहे थे..आगे चलकर एक हैंगिंग ब्रिज पर फोटो लिए ये ब्रिज हनोगी माता मंदिर के पास है उस टाइम हमे मंदिर का पता नहीं था सो मंदिर नहीं जा पाये. मंडी व सुंदर नगर होते हुए मनाली की तरफ बढ़ चले. सुंदर नगर वाकई सुंदर है. इस तरह हम तकरीबन 3 बजे मनाली पहुंचे,शहर मे घुसने से पहले एक एंट्री पोइंट था वहाँ एंट्री करवा कर पर्ची ली चार्ज कितना था वो अभी याद नहीं, वही पर कुछ हिमाचली युवतियाँ फल बेच रही थीं उनहोंने हमसे भी फल खरीदने की रिक्वेस्ट की उनके पास बेरोजगार जैसा कोई फल था उनका भोलापन सादगी व  निश्छल मुस्कान  देखकर हम मजबूर हो गये फल खरीदने के लिए. खैर पहाड़ी लोग होते बडे़ अच्छे हैं. मनाली पहुँच कर रुकने के लिए कमरा देखने लगे कोई 1000 कोई 1500 बोल रहा था एक कमरे का और 5 आदमियों के लिए 2 कमरे लेने पडते.. खैर थोड़ी देर कोशिश करने के बाद एक गेस्टहाउस मिला डोलफिन नाम से उसमें एक बड़ा कमरा मिला 900 रूपये में. सारा सामान कमरे में रखा और बाहर घूमने निकल लिए.और हाँ एक बात तो मैं बताना ही भूल गया घर से चलते टाइम 3 बोतल दारू की रख ली थी संदीप ने, क्योंकि वो और नीरज व गोविन्द कभी कभी सुरा पान कर लेते हैं.🍻
 अब आज उनकी पार्टी होनी थी, दिनभर के थके हुए थे तो गेस्टहाउस वाली आंटी को 8 बजे ही खाने का आर्डर दे दिया था. खाना बड़ा लाजवाब बना था, 9 बजे खाना खा कर मैं और महरा तो सो गये. क्योंकि सबह जल्दी ही हमें रोहतांग के लिए निकलना था  बाकि इन लोगों का पीने का प्रोग्राम चालू था.

सुबह 4 बजे उठे और सभी साथी बारी बारी से नहाकर फ्रेस होकर 6 बजे निकल पड़े रोहतांग पास के लिए बिना नाश्ता किए ही. मनाली से रोहतांग वाली रोड़ काफ़ी संकडी व कुछ जगहों पर खतरनाक भी है पर पूरे रास्ते बेहद खूबसूरत नजारे भी है. रास्ते में जगह जगह जाम लगना शुरू हो गया था क्योंकि सभी लोग सुबह जल्दी ही रोहतांग के लिए निकल जाते हैं. हम भी रोमांटिक संगीत सुनते हुए आगे बढ़ रहे थे, थोड़ा आगे पुलिस वालों ने नाका लगाया हुआ था वहाँ सभी को रोककर 50 रुपये की पर्ची काटी जा रही थी, पुलिस वाले ने हमें गाड़ी रोकने का इशारा किया लेकिन पता नहीं संदीप को क्या हुआ इसने गाड़ी नहीं रोकी, फिर क्या था एक पुलिस वाला हमें रोकने के लिए शार्टकट रास्ते से ऊपर की ओर भागा और हमे रोड़ पर आगे खड़ा मिला, अब क्या करे हमें लगा अब चालान होकर रहेगा, पर संदीप ने गाड़ी से उतरकर उस पुलिस वाले से बात की और अपना दिल्ली पुलिस का आई कार्ड दिखाया तो पुलिस वाले ने बोला यार आप लोगो को तो ऐसा नहीं करना चाहिए और उसने हमें जाने दिया. अब हमें थोड़ी भूख भी लगने लगी थी तो थोड़ा आगे चलकर एक जगह रुककर मैगी खाई. कुछ दूर जाने पर हमें भयंकर जाम मिला. उसमें हम 2 घंटे तक फंसे रहे. जाम से निकल कर रोहतांग पहुँचने ही वाले थे कि मौसम खराब हो गया हल्की हल्की बारिश होने लगी और ठंडी हवा चलने लगी और फिर से जाम लग गया, अब हमें सर्दी लगनी शुरू हो गई क्योंकि हमारे पास गरम कपड़े भी नहीं थे थोड़ी देर हम गाड़ी में ही घुसे रहे. बारिश बंद होने के बाद हम गाड़ी से बाहर निकले और तेज आवाज में म्यूजिक बजाकर नाचने लगे. हमें देखकर 2 लड़के हमारे पास आये और साथ में नाचने लगे, उनसे परिचय हुआ तो पता चला कि वो भी हरियाणा से हैं. उन्हें भी ठंड़ लग रही थी उन्होंने हमसे पूछा कि दारू का जुगाड़ है क्या? हमारे पास अभी 2 बोतलें बची हुई थी. एक बोतल कल रात में खत्म कर दी थी.हमने उन्हें 2-2 पैग दिए. थोड़ी देर में जाम खुला तो रोहतांग पहुँच गए, रोड़ के दोनों तरफ बर्फ़ की दीवार बनी हुई थी, बडा़ ही शानदार नजारा था, पहली बार इतनी ज्यादा बर्फ़ देखी थी हम सबने, दिल खुश हो गया ये नजारे देखकर.

वहाँ एक ढाबे पर खाना खाया और 2 -3 घंटे मस्ती करके वापस मनाली की तरफ लौट चले.
 शाम को 7 बजे के लगभग हम मनाली पहुँच चुके थे और फिर हमने सीधे घर वापसी का फैसला लिया क्योंकि अगले दिन हमें अपनी ड्यूटी पर भी जाना था. रातभर धीरे धीरे ड्राइव करते हुए हम सुबह 4 बजे चंडीगढ़ पहुंचे कीरतपुर होते हुए. अम्बाला के नजदीक एक ढाबे पर फ्रेश होकर चाय पी और फिर निकल पड़े घर की ओर. और सुबह 9:30 पर हम घर पहुँच गए... इस तरह हमारी मनाली की छोटी सी यात्रा पूरी हुई....

आशा करता हूँ कि आपको ये लेख पसंद आए....
    धन्यवाद!!!
 लेखक- नरेश गुर्जरमनाली यात्रा

6 comments:

  1. Aapki story padh kar mera bhi ghumne ka mann ho rha hai... jald hi main bhi nikalne wala hoon doston ke saath...thanks for sharing your journey sir

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  2. यात्रायें अनुभव देती हैं... दुनिया को समझने का जरिया है यात्रा

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  3. Thanks brother...पुरानी याद कों ताज़ा करने के लिए

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  4. भाई जी आपकी स्टोरी पढ़ कर हमारा भी यात्राओं से अनुभव लेने का मन कर रहा है

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